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अपने कार्यकाल में कई रिकार्ड बनाने वाले योगी आदित्यनाथ ने विधायकों को दी बधाई

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2022 में प्रचार के दौरान दौरान एक ही दिन में चार-पांच रैली के साथ ही रोड शो करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गुरुवार को परिणाम आने के बाद बड़ा सुकून मिला होगा। योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपने पहले ट्वीट में भारतीय जनता पार्टी के सभी निर्वाचित विधानसभा सदस्यों को बधाई भी दी है। नोएडा सहित तमाम मिथक तोड़ने वाले योगी आदित्यनाथ इंटरनेट मीडिया पर भी बेहद एक्टिव हैं।

योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को भाजपा के सभी नवनिर्वाचित विधायकों को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट किया कि उप्र विधान सभा चुनाव में नव निर्वाचित सभी विधान सभा सदस्यों को हार्दिक बधाई। विश्वास है कि आप सभी का आचरण सदन की गरिमा को अभिवर्धित करेगा और आप सभी जन अपेक्षाओं पर खरे उतरते हुए अंत्योदय के संकल्प को पूरित करने में सहयोगी सिद्ध होंगे। आपके उज्ज्वल कार्यकाल हेतु मंगलकामनाएं।

भगवाधारी हैं रिकार्डधारी : दरअसल नंबर एक पर रहना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फितरत है। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जब ढाई दशक पहले इस सुविख्यात पीठ के उत्तराधिकारी बने तब से उनके नाम रिकार्ड जुड़ते गये। मसलन 1998 में जब वह गोरखपुर से पहली बार सांसद चुने गए तब वह सबसे कम उम्र के सांसद थे। 42 की उम्र में एक ही क्षेत्र से लगातार 5 बार सांसद बनने का रिकॉर्ड भी उनके ही नाम है। सीएम बनने के पहले सिर्फ 42 वर्ष की आयु में एक ही सीट से लगातार पांच बार चुने जाने वाले वह देश के इकलौते सांसद रहे हैं।

नोएडा गए, सत्ता में भी आए : उत्तर प्रदेश में उपयोगिता साबित करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई मिथक भी तोड़े। 37 वर्ष बाद प्रदेश में भाजपा को सत्ता में लगातार दूसरी बार काबिज कराकर अपना दम दिखाया। सत्ता में रहते दोबारा वापसी का यह करिश्मा वर्ष 1985 में कांग्रेस ने करके दिखाया था। यही नहीं पूर्ण बहुमत की सरकार का चौका लगाकर ऐतिहासिक जीत का तोहफा दिया। वर्ष 2007 से लगातार पूर्ण बहुमत की सरकार बन रही है। योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में भाजपा के ऐसे पहले नेता हो गए हैं जो लगातार दूसरी बार सीएम बनेंगे।

टूट गया नोएडा का मिथक भी : यूपी की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बने इस इतिहास के साथ ही कई मिथक धराशायी हुए है। प्रदेश की राजनीति में अब तक माना जाता रहा है कि नोएडा जाने वाले मुख्यमंत्री की कुर्सी सुरक्षित नहीं रहती है। उसकी सत्ता में वापसी नहीं होती। इस कारण कुछ मुख्यमंत्री तो नोएडा जाने से बचते रहे। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव तो नोएडा जाने से परहेज करते रहे। नोएडा में उद्घाटन या शिलान्यास के कार्यक्रम को लेकर वहां जाने की जरूरत पड़ी, तो अखिलेश यादव ने नोएडा न जाकर अगल-बगल या दिल्ली के किसी स्थान से इस काम को पूरा किया। इसके विपरीत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नोएडा जाने से डरने के बजाय वहां कई बार गए। उन्होंने नोएडा जाने के बाद भी लगातार पांच साल मुख्यमंत्री रहकर और भाजपा को बहुमत से साथ फिर सत्ता में वापसी करते हुए इस मिथक को तोड़ दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अयोध्या में राममंदिर में पूजा करने जाने को लेकर भी नेताओं का मिथक तोड़ा है। पहले अयोध्या जाकर भी तमाम नेता राममंदिर जाने से परहेज करते थे। अब हर नेता राममंदिर में पूजा करने का रहा है।

उत्तर प्रदेश के इतिहास पर नजर डाले तो पता चलता है कि नोएडा का यह मिथक 1988 से शुरू हुआ था। 1988 में राजनीति में सक्रिय नेता नोएडा जाने से बचने लगे, क्योंकि यह कहा जाने लगा था कि नोएडा जाने वाले मुख्यमंत्री की कुर्सी चली जाती है। तब वीर बहादुर सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। वे नोएडा गए और संयोग से उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी चली गई। नारायण दत्त तिवारी को मुख्यमंत्री बनाया गया। वे 1989 में नोएडा के सेक्टर-12 में नेहरू पार्क का उद्घाटन करने गए। कुछ समय बाद चुनाव हुए, लेकिन कांग्रेस की सरकार में वापसी नहीं करा पाए। इसके बाद कल्याण सिंह और मुलायम सिंह यादव के साथ भी ऐसा ही हुआ कि वे नोएडा गए और कुछ दिन बाद संयोग से मुख्यमंत्री पद छिन गया। राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री थे तो उन्हें नोएडा में निर्मित एक फ्लाई ओवर का उद्घाटन करना था। पर, उन्होंने नोएडा की जगह दिल्ली से उद्घाटन किया। अखिलेश यादव ने भी पांच साल मुख्यमंत्री रहते हुए नोएडा जाने से परहेज किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह साबित किया है कि जनता के दुखदर्द का निदान करने का जो सरकार कार्य करती है, वह फिर सत्ता में आती है। मुख्यमंत्री ने दो सौ से ज्यादा जनसभाएं और रोड शो किए।

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