पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी चंदन सिंह जीना पर ED की कार्यवाही के बाद पिछले एक हफ्ते से उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज़ नेता हरीश रावत लगातार सुर्खियों में है। अब हरीश रावत ने ED को सोशल मीडिया के माध्यम से चैलेंज देते हुए एक पोस्ट फेसबुक के माध्यम से शेयर की है जिसमें उन्होंने लिखा है -कांग्रेस या किसी को भी ED प्रकरण में बचाव की मुद्रा में आने की आवश्यकता ही नहीं है। हम तो आमंत्रण की मुद्रा में हैं और मैं तो आमंत्रण देकर कह रहा हूँ कि जो भी भाई साहब हों—ईडी भाई साहब हों या कोई भाई साहब हों—आइए। मेरे 3 साल के कार्यकाल में जो भी नियुक्तियाँ हुई हैं, उन सबकी जाँच करिए। 42,000 से ज्यादा पदों पर नियुक्तियाँ की हैं, जहाँ पहुँचने में 10 साल से कई सरकारें, कई मुख्यमंत्री हाँफ रहे हैं। जाँच करिए ना!
आपदा के समय में पुनर्निर्माण और पुनर्वास की भी जाँच करिए ना और चाहो तो स्टिंग की भी जाँच करो—सरकार बचाने या गिराने की, जिस रूप में भी देखना चाहो—उसकी भी जाँच करो और कमीशन बनाकर के करो ना। संयुक्त (जॉइंट) कमीशन सेंट्रल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसीज का बनाओ और हरीश रावत के कार्यकाल की जाँच करो। किसी के ऊपर कोई दबाव न हो, किसी को बचाव की मुद्रा में न आना पड़े, इसीलिए मैंने जो दायित्व मेरे पास हैं, उनसे त्यागपत्र देने की बात कही है और मैं केवल सामान्य हरीश रावत के रूप में इस स्थिति का मुकाबला करना चाहता हूँ।
संविधान व कानून में कोई व्यवस्था नहीं है, नहीं तो जिन संवैधानिक पदों में मैं रहा, संविधान की शपथ लेकर के, मैं उन पदों की टाइटल को भी छोड़ देता। कहता, यह टाइटल भी मुझसे हटा दी जाए। लेकिन वह व्यावहारिक नहीं है। मगर मैं चाहता हूँ, मुझे उत्तराखंड के एक सामान्य नागरिक के तौर पर ट्रीट किया जाए और मेरे कार्यकाल की जाँच की जाए—नियुक्तियों से लेकर के सब बातों की जाँच की जाए और उसमें जो अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में मैंने नियुक्तियाँ की हैं, उसकी भी जाँच की जाए। इसलिए मैं कुछ अपने दोस्तों को, जिनको भारी मन से कलमें घसीटनी पड़ती हैं, उनसे कहना चाह रहा हूँ कि मेरे मामले में किसी को बचाव की नहीं, बल्कि आमंत्रण की मुद्रा में होना चाहिए और जो पुकार मैंने लगाई है कि कमीशन बनाओ, मेरे कार्यकाल की जाँच करो, उस पुकार को और गुंजायमान करना चाहिए।
मुद्दा टीवी।