वास्तु के मूल सिद्धांत क्या है ?
अहम् ब्रह्मास्मी अर्थात मै ही ब्रह्मा हु। हमारा शरीर एक ब्रह्माण्ड का ही समीकरण है और चूँकि पूरा ब्रह्मांड पाँच मूल तत्वों से बना है, हमारा शरीर भी पांच तत्वों से बना है : अग्नि, वायु, अंतरिक्ष, पृथ्वी और जल। इन पांच तत्वों से ही ब्रह्माण्ड को ऊर्जा मिलती है और इन्ही तत्वों के माध्यम से हमारे शरीर को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा आदि के रूप में आंतरिक ऊर्जा और गर्मी, प्रकाश, ध्वनि, हवा आदि के रूप में बाहरी ऊर्जा प्राप्त होती है। घर हमे बहार के संसार से जोड़ता है अपने मुख्य द्वार के द्वारा। शरीर को सही और सुचारु रूप से चलाने के लिए तत्वों का संतुलन आवश्यक है वैसे ही घर या दफ्तर को सुचारु रूप से चलाने के लिए भी इन उर्जाओ का संतुलन जरुरी है।
वास्तु के मूल सिद्धांत हमें इनमें से संतुलन हासिल करने में सक्षम बनाते हैं; बेहतर जीवन के लिए शरीर और दिमाग का अधिक लचीलापन देना भी सही वास्तु के परिणाम है।
जब इन तत्वों के बीच सामंजस्य बिगड़ जाता है तो हमारी ऊर्जा अलग-अलग दिशाओं में फैल जाती है जिससे तनाव, तनाव और खराब स्वास्थ्य होता है और हमारे मन की शांति नष्ट हो जाती है। सही वास्तु द्वारा फिर हमें अपनी ऊर्जा को विषयपरक और साथ ही वस्तुनिष्ठ रूप से पुनर्निर्देशित करना होगा, ताकि आंतरिक / बाहरी ऊर्जाओं के बीच एक संतुलन प्राप्त किया जा सके, एक स्वस्थ शरीर और सुखी मन प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य, धन, खुशी, समृद्धि और सफलता प्राप्त की जा सके।
वास्तु के मूल सिद्धांत क्या है ?
सेलिब्रिटी वास्तु शास्त्री डॉ सुमित्रा अग्रवाल , कोलकाता