देहरादून। महिला सशक्तिकरण की एक सशक्त मिसाल जिन्होंने अपने जीवन-संघर्षों के बावजूद सफलता, सम्मान, नाम और प्रसिद्धि प्राप्त की। अपने संघर्षपूर्ण समय में उन्होंने समर्पण और निष्ठा के साथ कठिन परिश्रम किया तथा तकनीकी शिक्षा उत्तराखंड के डिप्लोमा पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए अनेक पुस्तकें लिखीं और कई पैन इंडिया काव्य प्रतियोगिताओं की विजेता रह चुकी हैं।उनकी कविताएँ विभिन्न साझा काव्य-संकलनों (Anthology Books) में प्रकाशित हुई हैं, जहाँ उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय सह-लेखिका के रूप में पहचान मिली।
उनकी एकल काव्य-पुस्तक “आहत से राहत तक” को भी विभिन्न मंचों पर सम्मानित और पुरस्कृत किया गया है।
उनकी कविताओं का प्रसारण आकाशवाणी देहरादून से भी किया गया है।उन्हें उनके आजीवन योगदान, व्यावसायिक जीवन-यात्रा तथा भारतीय साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। ऐसी ही एक प्रभावशाली शख्सियत का नाम है—डॉ. इन्दरजीत कौर अरोड़ा।
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में जन्मी और देहरादून के एक प्रतिष्ठित महिला पॉलिटेक्निक में विभागाध्यक्षा के पद पर कार्यरत डॉ. अरोड़ा न केवल एक कुशल विभागाध्यक्षा हैं अपितु एक संवेदनशील रचनाकार भी हैं जिनके भीतर नारी जीवन और समाज की धड़कनों को शब्दों में ढालने की अद्भुत कला है इसका उदाहरण है उनको मिले पुरस्कार ।डॉ. इन्दरजीत कौर अरोड़ा ने कई पुरस्कार प्राप्त किये जैसे: ऑनरेरी डॉक्टरेट एवार्ड, राष्ट्रहित सेवा अटल सम्मान पुरस्कार,अंतर्राष्ट्रीय नारी सशक्तिकरण पुरस्कार,वर्दी वुमेन ऑफ इंडिया एवार्ड,,नेशनल प्राइड एंड एक्सीलेंस एवार्ड,श्रेष्ठ भारत पुरस्कार, हिंदी गौरव सम्मान,एम्बलम ऑफ एक्सीलेंस एवार्ड,संविधान गौरव सम्मान,इंटरनेशनल को-ऑथर एवार्ड, कलम रत्न पुरस्कार, साहित्यनामा सम्मान पत्र, वैलेंटाइन स्पेशल बुक कंटेंट्स एवार्ड, अस्तित्व & वुमेन्स प्राइड एवार्ड, इंडियन राइटर्स लीग एवार्ड,पिनेकल एवार्ड,ग्लोबल क्राउन ऑफ इंस्पायरिंग अचीवमेंट, भारत विभूषण सम्मान,लाइफ टाइम अचीवमेंट एवार्ड, भारत विभूषण सम्मान,आइकॉनिक वीमेन अवार्ड
शिक्षा और अध्यापन यात्रा:
डॉ. अरोड़ा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि अत्यंत समृद्ध रही है। उन्होंने दो विषयों हिंदी और समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है, साथ ही तकनीकी शिक्षा प्राप्त करते हुए सीनियर सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस तथा कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा प्राप्त किया है। इस बीच उन्होंने डिप्लोमा पाठ्यक्रम—’मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट एंड सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस’ हेतु कई पाठ्यक्रम पुस्तकें लिखीं और एक लेखक के रूप में छात्राओं के हित में बहुमूल्य योगदान दिया।उन्होंने अपने करियर की शुरुआत लेक्चरर के रूप में 1990 में की। तत्पश्चात विभागाध्यक्षा तथा उप-प्रधानाचार्या तक का सफर तय किया। इस दौरान फील्ड में रहकर उन्होंने महिला मंच उत्तराखंड के साथ सीधा जुड़ाव स्थापित किया, जिससे न केवल उनके सामाजिक अनुभव समृद्ध हुए, अपितु उनके भीतर लेखन की एक सशक्त प्रेरणा भी जागृत हुई।
साहित्यिक अभिरुचि और लेखन संसार:
डॉ. इन्दरजीत कौर अरोड़ा की साहित्यिक यात्रा अनुभवों की भूमि पर अंकुरित होकर संवेदना के जल से सींची गई है। वह शब्दों की सहजता और भावों की गहराई को बहुत सुंदर तरीके से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी रचनाएं रवीना प्रकाशन, यशिता प्रकाशन, ब्लू क्लाउड प्रकाशन, साहित्यनामा आदि प्रतिष्ठित संस्थाओं के साझा संकलनों में प्रकाशित हुई हैं। उनकी एक कृति “आहत से राहत तक” का विश्व पुस्तक मेला 2026 में विमोचन हुआ, जिसमें नारी जीवन की सच्चाइयां, सामाजिक अंतर्द्वंद्व और मानवीय संवेदनाएं स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती हैं।
डॉ इंद्रजीत अरोड़ा की उपलब्धियों को देखते हुए हम कह सकते हैं डॉ. इन्दरजीत कौर अरोड़ा एक ऐसी रचनाकार हैं जो तकनीकी प्रशिक्षक के कर्तव्यों और रचनात्मक लेखन के बीच संतुलन बनाना जानती हैं। उनके व्यक्तित्व में विनम्रता, गंभीरता और संवेदनशीलता का सहज समावेश है। वह न केवल अपने दायित्वों के प्रति सजग हैं, बल्कि साहित्य के माध्यम से समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। उनका लेखन किसी विशेष शैली या परिभाषा में बंधा हुआ नहीं है—वह प्रयोगशील हैं, विचारशील हैं और भाव प्रधान भी। यही विविधता उन्हें समकालीन लेखकों की भीड़ में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती है।
देवेंद्र प्रसाद, प्रधान संपादक,मुद्दा टीवी।