न्यायपालिक का दायित्व लोकतंत्र की रक्षा करना है : प्रो. (डॉ.) अनिल दीक्षित संकाय-अध्यक्ष देवभूमि उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय
देहरादून ! दीक्षारम्भ 2026 का आयोजन देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के विधि विभाग में दीप प्रज्ज्वलित कर गणेश वंदना के साथ हुआ मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित, श्री गोपीनाथ दास, इस्कॉन देहरादून ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि, चंचल मन को नियंत्रण में रखना ही आध्यात्म है। ज्ञात हो कि , इस्कॉन का पूरा नाम ‘अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ’ है। इसकी स्थापना 13 जुलाई 1966 को न्यूयॉर्क शहर में ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद द्वारा की गई थी। यह संस्था गौड़ीय-वैष्णव परंपरा और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति को समर्पित है।इस अवसर पर विधि विभाग के प्रोफेसर डॉ अनिल कुमार दीक्षित ने इस संघ के कार्यो को अवगत कराते हुए बताया कि देहरादून में इस्कॉन की मूल इकाई इस्कॉन बैंगलोर है जिसकी स्थापना वर्ष 2000 मे संस्थापक श्रील प्रभुपाद की प्रेरणा से की गयी थी इसकी स्थापना का मूल मंत्र था “किसी भी बच्चे को भूखा नहीं रहना चाहिए”। इसके ट्रस्ट बोर्ड में इस्कॉन बैंगलोर के मिशनरी सदस्य शामिल हैं।
कार्यक्रम में श्री वर्धनदास इस्कॉन, अक्षयपात्र मिशन के सदस्य ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्हें अनुशाषित रह कर पठन पाठन में गंभीरता लानी होंगी , उन्होंने छात्र-छात्राओ को अनुशासन के महत्व को भी बताया ।स्कूल ऑफ़ लॉ के विधि विभागाध्यक्ष, ड़ॉ. गौरव त्यागी ने दीक्षारम्भ कि उपयोगिता पर प्रकाश ड़ालते हुए बताया कि दीक्षारम्भ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली द्वारा शुरू किया गया एक छात्र प्रेरण कार्यक्रम है, जिसका अर्थ सीखने की शुरुआत है। इसका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में नए आने वाले छात्रों को उच्चसंस्थान के माहौल में सहज बनाना, उन्हें नियमों व संस्कृति से परिचित कराना, और शिक्षकों के साथ पारंपरिक अच्छे संबंध स्थापित करना है।
दीक्षारम्भ आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आकर देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में दाखिला लिये छात्र-छात्राओ के साथ साथ लॉ फैकल्टी, सुश्री आकांक्षा भट्ट, हिमांशु जखमोला, ड़ॉ. विनोद जोशी, नीलम सिँह, स्माइल गोयल , लाइब्रेरीयन मीनाक्षीदेवी मौजूद रहे,।मंच-संचालन सुश्री आकांशा भट्ट एवं स्माइल गोयल ने किया अंत में सुश्री स्माइल गोयल ने सभी का आभार अर्पित किया
मुद्दा टीवी खबर, देहरादून।