आज से लगभग 1 साल पहले तक कांग्रेस पार्टी के लिए चुनाव दर चुनाव हारना जैसे एक आदत हो गई थी 2014 में केंद्र की सत्ता से हाथ धोने के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को बड़ी पराजय झेलनी पड़ी थी और इस बीच कई राज्यों की विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन इतना गिर गया था कि पार्टी की नीति और विचारधारा पर कई सवाल उठने लग गए थे।उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, और उत्तर प्रदेश ,गुजरात के चुनाव के बाद तो खुद कांग्रेस के अंदर एक ऐसा धड़ा बन गया था जिसने कांग्रेस की नीति और नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए इसे डूबता हुआ जहाज घोषित कर दिया था ।इस दौरान कांग्रेस के कई बड़े नेता या तो पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे या फिर बयानबाजी से पार्टी की नीतियों की सख्त आलोचना कर रहे थे।
लेकिन कहते हैं कि हर घने अंधेरे के बाद उजाले की किरण दिखती है और कांग्रेस पार्टी के लिए उजाले की किरण बनी कांग्रेस पार्टी के द्वारा लिए गए 2 निर्णय जिसने कांग्रेस को न केवल फिर से वापस जीत की पटरी पर ला दिया बल्कि कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया उन दो निर्णयों में से पहला निर्णय था भारत जोड़ो यात्रा के रूप में राहुल गांधी का जनता से सीधा संवाद और भारत देश को समझना ।दरअसल राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 7 सितंबर 2022 को कन्याकुमारी से उस समय शुरू हुई जब खुद राहुल गांधी ऐसे दौर से गुजर रहे थे जहां आम जनता राहुल गांधी की सोशल मीडिया के द्वारा बनाई गई इमेज से ही रूबरू हो रही थी और विपक्षी पार्टी ने राहुल गांधी की इमेज आम जनता और खासकर युवाओं में ऐसी बना दी थी कि राहुल गांधी की चुनावी रैलियों का फायदा कांग्रेस पार्टी को वोट के रूप में नहीं मिल पा रहा था ।लेकिन भारत जोड़ो यात्रा में चमत्कारिक रूप से राहुल गांधी को ब्रांड राहुल के रूप में ना केवल युवाओं के बीच स्थापित कर दिया बल्कि हर वर्ग चाहे वो युवा हो या बुजुर्ग हो या महिला हो हर वर्ग ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को सपोर्ट किया और इसका प्रमाण था राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में उमड़ा जनसैलाब और 3 महीने जब तक राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा चलती रही तब तक राहुल गांधी ना केवल देश की मीडिया में छाए रहे बल्कि विदेशी मीडिया में भी उनकी खूब चर्चा हुई जिसका फायदा निश्चित रूप में कांग्रेस को कर्नाटक में मिला ।
दूसरा अहम निर्णय कांग्रेस पार्टी का जिसने कांग्रेस को इस कठिन परिस्थिति से निकलकर जीत का रास्ता खोजने में एक अहम भूमिका निभाई थी वह निर्णय था एक जमीन से जुड़े सूझबूझ वाले शख्स को कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त करना । कांग्रेस पार्टी ने एक बहुत ही अहम समय में कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में मल्लिकार्जुन खड़गे के रुप में एक बहुत ही अनुभवी नेता को कांग्रेस पार्टी की कमान सौंपी एक ऐसा नेता जिसके पास राजनीति का एक लंबा अनुभव और पार्टी को एकजुट कर साथ चलने की योग्यता है और विपक्ष को घेरने की रणनीति है और इसी रणनीति के तहत उन्होंने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में फूंक-फूंक कर कदम रखा चाहे वह चुनावी घोषणापत्र हो या चुनाव प्रचार की रणनीति हो या फिर विपक्षी पार्टी के खिलाफ बयानबाजी हो उनके नेतृत्व में कर्नाटक मे एक अलग और जीत के लिए लालायित कॉन्ग्रेस देखने को मिली और इसी का परिणाम है कि पिछले 40 सालों में पहली बार कांग्रेस को कर्नाटक में प्रचंड बहुमत मिला ।
अब देखना यह होगा कि कांग्रेस पार्टी जीत की लय को आगामी विधानसभा चुनाव में बरकरार रख पाती है या फिर नहीं क्योंकि अगर आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कम से कम 2 राज्य मे भी जीत जाती है तो उसका कहीं ना कहीं फायदा आने वाले लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस पार्टी को मिलना तय है और 2024 से पहले उसके पक्ष में एक हवा बनना भी तय है। और अगर 2 राज्य भी नही जीत पाई तो फ़िर कांग्रेस को 2024 के लिए शून्य से शुरुवात करनी पड़ेगी।
देवेन्द्र प्रसाद, एडिटर इन चीफ, मुद्दा टीवी ख़बर
Good Going Sir