
मुस्कुराइये आप लखनऊ में हैं. लखनऊ में प्रवेश करते ही लिखा यह वाक्य हर मायने में स्वयं को साकार करता है। एक शहर जो इतिहास को समेटे, आधुनिकता के रंग में अपनी मूल संस्कृति को संजोए हुए आगे बढ़ता जा रहा है। इतिहास की बात करें तो लखनऊ का नाम भगवान राम के अनुज लक्ष्मण के नाम पर लक्ष्मणपुर / लखनपुर पड़ा। 11वीं सदी के आस पास जो लखनपुर / लक्ष्मणपुर था वो आज के समय में लखनऊ है। इतिहास के काले और कुछ सुनहरे अध्यायों से गुज़रता हुआ ये शहर आज भी अपनी धुन में गुनगुनाता हुआ अपनी कहानी कह रहा है।
अपनी शाम के लिये मशहूर लखनऊ उर्दू के शायरों से लेकर पुराने लखनऊ में आज भी सजने वाली महफिलों में खुद को संजोए हुए अपने कलंकित मुजरे और बेहतरीन चिकनकारी के कपड़ों के लिये भी मशहूर है। मुगलों से लेकर नवाबों और नवाबों से लेकर अंग्रेजो तक सब ने इस शहर की संस्कृति पर अपनी छाप छोड़ी। संस्कृति, रहन-सहन और भाषा सब में अनेकों संस्कृतियों का संगम संजोए आज भी हमारा शहर खुद को निखारता जा रहा है।
यहाँ की एतिहासिक इमारतें यहाँ की बहुसंस्कृतीय सभ्यता की
गवाही देती हैं। बड़ा इमाम बाड़ा जोकि अवधी कला का बेहतरीन नमूना है, अपने आप में कई खूबियां समेटे है। अनेकों गलियारों के जाल से बनी भूल भुलैया और बिना किसी स्तम्भ के टिका एशिया का सबसे बड़ा हॉल हो या चीनी कला से प्रेरित इमामबाड़े का एक अन्य हॉल सहसा ही आकर्षित करते हैं। इसी परिसर में पानी के स्रोत के लिये एक सीढ़ीदार बावड़ी (Stepwell) भी निर्मित है परिसर के प्रवेश द्वारों से लेकर बागों तक सब में अवध की अवधी कला जोकि मुगल कला से प्रेरित है, अपनी सुंदरता की गवाही देती है। परिसर में ही आसिफी मस्जिद भी मौजूद है। इसी के अलावा रूमी दरवाज़ा जोकि कांस्टेनटाइनटिनोपल के दरवाजों की तरह दिखने के कारण तुर्किश गेट कहा जाता है, अवधी निर्माण कला का उम्दा नमूना है, भारत का विशालतम घण्टाघर जोकि 67 मीटर ऊँचा हैं सर जॉर्ज कूपर के आगमन पर नवाब नासिर-उद्-दीन-हैदर ने उसके स्वागत के लिये लंदन के बिग बेन की तर्ज पर बनवाया था।इसके अलावा पुराने लखनऊ की ऐसी कई हमारतें जैसे कि लखनऊ विश्वविद्यालय, ला मार्टिनियर कॉलेज, राज्य ललित कला अकादमी, रेजीडेंसी आदि अन्य इमारतें अवध और अवध-अंग्रेजी कला का उदाहरण है।
आज का लखनऊ एक महानगर है जोकि 100 से अधिक सेक्टर्स में बंटा है। लखनऊ में ही एशिया की सबसे बड़ी नियोजित कॉलोनी कहा जाने वाला गोमती नगर स्थित है जोकि कई खंडों में बंटा हुआ है। 2011 की जनगणना के अनुसार लखनऊ की जनसंख्या 28 लाख के करीब है जोकि भारत में 11 वां स्थान रखता है। आज लखनऊ बदल रहा है कुछ अच्छे और बुरे बदलावों के साथ। लखनऊ CCTV कैमरों से लैस शहर है। आधुनिकीकरण और औद्योगिकीकरण की वजह से भारत के अन्य विकसित होते शहरों की तरह ही लखनऊ भी विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित नगरों में की सूची में टॉप 5 में जगह बना चुका है।
महिला सुरक्षा के लिये काफी कदम उठाए गए जोकि अभी तक सफल होते नही दिखते हैं। भारत के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य की राजधानी के रूप में लखनऊ अपनी एक अलग पहचान रखता है। राज्य की राजधानी होने के कारण लगभग सभी राजकीय विभागों, मंत्रालयों आदि के मुख्यालय उपस्थित यहीं उपस्थित हैं।
लखनऊ आज देश-विदेश के शहरों से वायु और देश के शहरों से रेल व सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। अमौसी हवाई अड्डा यहाँ का मुख्य वायुपत्तन तथा चारबाग में स्थित रेलवे स्टेशन यहाँ का मुख्य रेलवे स्टेशन है। नगर के अंदर मेट्रो, नगर बस सेवा के साथ-साथ रिक्शा व ओला-उबर यातायात के कई साधन उपलब्ध है।
पर्यटकों के लिये लखनऊ में काफी कुछ मौजूद है। बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा से लेकर रूमी गेट,
घण्टाघर, रेजीडेन्सी आदि ऐतिहासिक स्थलों से लेकर भारत के सबसे पुराने चिड़ियाघरों में एक लखनऊ का चिड़ियाघर, राज्य संग्रहालय, हज़रतगंज, अमीनाबाद में चिकनकारी के कपड़ों और किताबों का बाज़ार, एशिया का सबसे बड़ा कम्यूनिटी पार्क-जनेश्वर मिश्र पार्क, डॉ भीमराव अम्बेडकर स्मृति स्थल व पार्क, गोमती रिवर फ्रंट आदि अनेको स्थल के साथ नगर के आसपास स्थित कुछ पर्यटन स्थल जैसे काकोरी, बाराबंकी स्थित महाभारतकालीन पारिजात वृक्ष, देवां शरीफ आदि अनेकों स्थल जो ऐतिहासिक, धार्मिक, पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
त्योहारों और उत्सवों की बात करें तो आज भी गंगा-जमुनी तहजीब और कौमी एकता की परिकल्पना को साकार करते हुए सारे धर्मों के त्यौहार काफी उत्सुकता से मनाये जाते हैं। भारत में सर्वाधिक शिया जनसंख्या प्रतिशत वाले नगर और शिया नवाबों से जुड़े इतिहास के कारण यहाँ मोहर्रम बहुत उल्लास के साथ साथ
मनाई जाती है। लखनऊ अपनी नवाबी तहज़ीब के साथ- साथ नवाबी जायके के लिये भी मशहूर है। लखनऊ के नवाबों की रसोईयां जाने कितने ही अलहदा जायकों का घर हैं जो अनेको मसालों के मिश्रण से ईजाद किये गये हों और जिन्होंने अवध की नवाबी पाक कला को निखारा हो। कबाब के अनेकों जायकों से लेकर दुनिया भर में मशहूर लखनवी बिरियानी को जायके के भी शौकीनों की कमी नहीं है।
इसी के साथ अवध के नगीने लखनऊ की शाम और कला व संस्कृति के दीवानों के लिये लखनऊ किसी स्वर्ग से कम नही।
कृष्णा गोपाल मिश्रा, लखनऊ
हमारे शहर का बहुत ही उम्दा उल्लेख…..
I have heard a lot about Lucknow, but I really liked this work by you ❤️