उत्तराखंड। देश में जब भी किसी बड़े जन-आंदोलन ने जन्म लिया, वहां एक नाम अपनी दृढ़ता, बेबाकी और संघर्ष के साथ हमेशा अग्रिम पंक्ति में दिखाई दिया भोपाल सिंह चौधरी, अन्ना आंदोलन हो, किसान आंदोलन हो, या प्रकृति–पर्यावरण संरक्षण की बात—हर संघर्ष में भोपाल सिंह चौधरी की भूमिका सबसे मजबूत, निर्णायक और प्रभावशाली रही है।
वर्ष 2013 और 2018 में अन्ना हजारे का उत्तराखंड दौरा करवाने का श्रेय भी भोपाल सिंह चौधरी को ही जाता है। उस समय भोपाल सिंह चौधरी उत्तराखंड अन्ना टीम के प्रदेश अध्यक्ष थे और राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ माहौल बनाने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।विश्व का सबसे बड़ा 13 महीने का किसान आंदोलन—टीकरी, सिंघु, गाजीपुर और पलवल बॉर्डर…जहाँ 40 सदस्यीय SKM कोर कमेटी बनी, उनमें भी इस किसान नेता की भूमिका सबसे प्रमुख रही। भोपाल सिंह चौधरी और अन्ना हजारे के प्रयासों से ही आंदोलन स्थगित हुआ और अंततः प्रधानमंत्री मोदी को किसानों से माफ़ी मांगकर कानून वापस लेना पड़ा।
उत्तराखंड के श्रीनगर (गढ़वाल) के रहने वाले भोपाल सिंह चौधरी पर राज्य आंदोलन के दिनों में पुलिस चौकी फूंके जाने, PAC की राइफलें छीनने और आगज़नी जैसे कई मुकदमे दर्ज हुए। कई बार जेल गए, संघर्ष झेला—लेकिन राज्य निर्माण के बाद सरकार द्वारा मुकदमे वापस लिए जाने के बावजूद इस किसान नेता ने न पेंशन ली, न आरक्षण, न सरकारी नौकरी। यही नहीं श्रीनगर की आराध्य शक्ति पीठ ‘माँ धारी देवी’ के मूल मंदिर को डूबने से बचाने के लिए भोपाल सिंह चौधरी और उनकी टीम ने दो वर्ष तक संघर्ष किया ये आंदोलन आज भी उत्तराखंड की स्मृतियों में एक मिसाल है।
अब एक नया संघर्ष — गंगोत्री मार्ग के हज़ारों पेड़ों को कटने से बचाने का संकल्प: आज जब गंगोत्री मार्ग पर विकास के नाम पर हज़ारों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने की तैयारी है, ऐसे में फिर एक बार भोपाल सिंह चौधरी संघर्ष की राह पर इन पेड़ो को बचाने के लिए निकल पड़े हैं और भोपाल सिंह चौधरी के प्रयासों का ही नतीजा है कि आज शंकराचार्य जी,अनेक संत समाज,वरिष्ठ पर्यावरणविद पूर्व केंद्रीय मंत्री, सांसद ,सामाजिक आंदोलनकारी सब इस मुहिम से जुड़े हैं, और अब इन पेड़ों की आवाज़ भारतीय संसद तक पहुंचने लगी है। भोपाल सिंह चौधरी से बात करने पर और उनके संघर्ष पर बात करने पर वो कहते हैं कि हिमालय के लिए मेरा संघर्ष जारी रहेगा क्योंकि हिमालय है तो हम हैं ।भोपाल सिंह चौधरी के बारे में हम कह सकते हैं कि ये किसान नेता उन विरल व्यक्तित्वों में से हैं जो पद नहीं, संघर्ष चुनते हैं…जो लाभ नहीं, लोक का भला देखते हैं…जो आंदोलन खड़े नहीं करते, उन्हें सफल बनाते हैं…और आज भी—वे हिमालय, जंगल, जल, जमीन और उत्तराखंड की आत्मा को बचाने की लड़ाई में सबसे आगे खड़े हैं। उनके इसी कार्य के लिए मुद्दा टीवी ने भोपाल सिंह चौधरी को मुद्दा टीवी उत्तराखंड शिरोमणि सम्मान 2025 से सम्मानित किया था।
मुद्दा टीवी।