पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने धामी सरकार के उस निर्णय के खिलाफ नाराज़गी जाहिर की है जिसके अंतर्गत सरकार अनुसूचित जाति, जनजाति और गरीब लोगों के हरीश रावत सरकार में जारी किए गए जमीन के पट्टे को निरस्त कर रही है। हरीश रावत ने अपनी फेसबुक वॉल में लिखा है”सरकार ने 2015-16 में ऐसे समस्त पट्टों को जो अनुसूचित जाति, जनजाति और अति गरीब लोगों को घर बनाने के लिए है या थोड़ा सा कृषि कार्य करने के लिए ग्राम पंचायत की जमीनों पर धारा 132 के तहत पट्टे दिये गये थे और इसके अलावा कुछ आसामी श्रेणी के लोग थे जो वर्ग 3 में आते थे, उन्होंने अपने अड़ोस-पड़ोस में थोड़ी सी जमीन पर वह कब्जाधारी थे और उनको इसी तरीके से थोड़ी सी कहीं अपनी संपत्ति ली और उसके बगल में कोई थोड़ी सी जमीन खाली थी, वह उस पर भी काबिज हो गया। उस पर उसने सब्जी आदि बोना प्रारंभ कर दिया तो ऐसे कब्जे धारकों को हमारी सरकार ने नियमितीकरण कर दिया था। उनको उस जमीन का मालिकाना हक, भूमि धरी हक दिए जाने के मंत्रिमंडल का प्रस्ताव करवा दिया था और शासनादेश जारी कर दिए गए थे। बहुत सारे लोगों को उसके तहत मालिकाना अधिकार मिले भी। लेकिन मुझे बहुत दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि इस समयहरिद्वार,उधमसिंहनगर, नैनीताल में, यहाँ तक की देहरादून में भी और भी राज्य के कुछ जिलों के अंदर ऐसे सभी पट्टे धारकों को पट्टे निरस्त किए जा रहे हैं, उनको रद्द कर दिया जा रहा है, कोई उनकी सुनवाई नहीं की जा रही है और यह सारे काम वर्ष 2016 के शासनादेश का उल्लंघन करते हुए किए जा रहे हैं। मैं इसकी निंदा करता हूं और इस सबके खिलाफ कि मैंने यह निश्चय किया है कि मैं दिनांक-27 जुलाई को दोपहर 12 बजे अपने देहरादून स्थित आवास पर 1 घंटे का मौन_व्रत रखूंगा ताकि धामी_सरकार को सद्बुद्धि आए और इन सब पट्टे धारकों के पट्टों को नियमितकृत किया जा सके”। अब देखना ये होगा कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के मौन व्रत के बाद सरकार इस संबंध में कोई कदम उठाएगी या नहीं?
मुद्दा टीवी।