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बीजेपी के सीनियर विधायकों को था भरोसा मंत्री बनने का, हो गया कुछ और

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देहरादून।आखिरकार 2027 से पहले धामी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हो ही गया हरिद्वार से विधायक मदन कौशिक ,रुड़की से विधायक खजान दास, रुद्रप्रयाग से विधायक भरत चौधरी, भीमताल से विधायक राम सिंह कैड़ा , और राजपुर से विधायक खजान दास, और रुड़की से विधायक प्रदीप बत्रा को धामी मंत्रिमंडल में जगह मिल गई।

आपको बता दें पिछले लंबे समय से उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं थी लेकिन धामी सरकार के 4 साल बीत जाने के बाद भी धामी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार नहीं हुआ था। लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव देखते हुए राजनीतिक पंडित ये मान रहे थे कि मंत्रिमंडल का विस्तार जरूर होगा और पिछले लंबे समय से मीडिया  और सोशल मीडिया में कुछ विधायकों के नाम को लेकर चर्चा चल रही थी जिनमे देहरादून जिले से विनोद चमोली, उमेश शर्मा काऊ, मुन्ना सिंह चौहान, बागेश्वर जिले से सुरेश गड़िया, डीडीहाट से विधायक बिशन सिंह चुफाल, कालाढूंगी से विधायक बंशीधर भगत,पुरोला से विधायक दुर्गेश्वर लाल का नाम बार बार चर्चा में आ रहा था  । लेकिन बीजेपी आलाकमान ने तरजीह दी खजान दास, प्रदीप बत्रा, मदन कौशिक, राम सिंह कैड़ा, और भरत चौधरी को। वही विपक्ष ने मंत्रिमंडल विस्तार पर चुटकी लेते हुए कहा है कि पहले भी मंत्रिमंडल में कांग्रेसी बैकग्राउंड के नेताओं को स्थान मिला और अब भी पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेसी बैकग्राउंड के नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल करके ये साबित कर दिया है कि बीजेपी कांग्रेस से आये नेताओं पर ज्यादा भरोसा करती है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तो यहां तक कह दिया कि बीजेपी के विधायक केवल दरी बिछाने के लिए ही हैं क्योंकि मंत्रिमंडल में 7 मंत्री कांग्रेसी बैकग्राउंड के हैं।

फिलहाल धामी सरकार ने मंत्रिमंडल का विस्तार ऐसे समय में किया है जब विधानसभा के चुनाव को एक साल से भी कम का समय बचा है और बीजेपी  चुनाव से पहले किसी भी प्रकार का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती कि पार्टी के भीतर किसी भी बात को लेकर कोई असंतोष रहे। इसी के तहत बीजेपी ने 5 विधायकों को मंत्री बना दिया लेकिन चाहे खुलकर कोई न बोले लेकिन कई सीनियर विधायकों को ये भरोसा था कि चुनाव से पहले उनको मंत्री बनाया जाएगा लेकिन हुआ ऐसा नहीं ऐसे में कही न कही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का बयान कही न कही बीजेपी के उन विधायकों को जरूर खटक रहा होगा जिनको पूरा भरोसा था कि उनकी सीनियरिटी को देखते हुए उनको मंत्री पद जरूर दिया जाएगा लेकिन हो गया कुछ और यही राजनीति है जिसे आज तक कोई नहीं समझ पाया।

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