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पैसा कमाने का जरिया बना जल जीवन मिशन , आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ हो रहा है शोषण और भेदभाव : भारतीय किसान यूनियन एकता शक्ति

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देहरादून, उत्तरांचल प्रेस क्लब में भारतीय किसान यूनियन एकता शक्ति उत्तराखंड की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में  जल जीवन मिशन (जेजेएम) निदेशालय में कार्यरत आउटसोर्स कंपनी पी.ई.जे.के.एस. के माध्यम से हटाए गए उत्तराखंड मूल के युवा-युवतियों का मुद्दा उठाया गया। प्रेस वार्ता में आरोप लगाते हुए भारतीय किसान यूनियन एकता शक्ति के  पदाधिकारीयों ने कहा कि”बाहरी और भेदभावपूर्ण” मानसिकता वाले अधिकारियों ने आउटसोर्स कंपनी के साथ सांठगांठ कर, ढाई साल से कार्यरत उत्तराखंड के युवाओं को उनकी नौकरी से हटा दिया है। जबकि जल जीवन मिशन की समय-सीमा सरकार द्वारा 2028 तक बढ़ा दी गई है और पूर्व से कार्यरत आउटसोर्स कंपनियों को भी कार्य दिया गया है। हटाए गए युवाओं के स्थान पर अन्य व्यक्तियों को नियुक्त किया गया है, यह तब हो रहा है जब शासन ने विभागों में नई नियुक्तियों पर रोक का जी.ओ. जारी किया है। वक्ताओं ने इसे “पैसे कमाने का धंधा” बताया।
यह भी खुलासा किया गया कि पूर्व में कुछ अधिकारियों ने इन युवाओं पर अपने घरों में काम करने का दबाव डाला था, जिससे कुछ को नौकरी छोड़नी पड़ी थी। जिन्होंने इनकार किया, उन्हें हटाने के पीछे पड़ गए। एक ए.ई. अधिकारी ने बताया कि उन पर मुख्यमंत्री कार्यालय से “अपने व्यक्तियों को रखने” का दबाव डाला जा रहा था।

प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि हटाए गए कर्मचारियों को उनके सेवाकाल का वेतन नहीं दिया गया और आउटसोर्स कंपनी ने ढाई साल से उनके पी.एफ. और एस.सी.आई. के नाम पर पैसे काटे, जो विभाग और ठेकेदार कंपनी की मिलीभगत से “ठगे” गए। एक महिला कर्मी को मातृत्व अवकाश का वेतन भी नहीं दिया गया और विभागीय अधिकारी फाइल पास करने के एवज में “चाय-पानी” के नाम पर पैसे मांग रहे हैं। महिला कर्मचारियों के साथ उत्पीड़न और “गलत नजर एवं मानसिकता” रखने वाले अधिकारियों के भी आरोप लगाए गए।

उत्तराखंड रक्षा अभियान के संयोजक ब्रह्मचारी हरिकिशन किमोठी और भारतीय किसान यूनियन एकता शक्ति उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र दत्त शर्मा ने सरकार से मांग की है कि जल जीवन मिशन कार्यालय से ग्राम्य विकास विभाग और सिंचाई विभाग से प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए भ्रष्ट अधिकारियों को तत्काल हटाया जाए, उनकी अकूत धन-संपदा की जांच की जाए और उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त की जाए। वक्ताओं ने जोर दिया कि यह मिशन जन सुविधा के लिए है और इसमें अनुभवी, जिम्मेदार और ईमानदार अधिकारी होने चाहिए जो उत्तराखंड की बहन-बेटियों का सम्मान करें। उन्होंने आरोप लगाया कि ये अधिकारी उत्तराखंड के लोगों को हेय दृष्टि से देखते हैं और इन्हें “देवभूमि से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए।”वक्ताओं ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट और वरिष्ठ मंत्री सतपाल महाराज द्वारा लिखे गए पत्रों की भी अधिकारियों द्वारा अनदेखी पर अफसोस व्यक्त किया।उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों की निरंकुशता और हठधर्मिता से उत्तराखंड के सीधे-सादे लोग आहत हैं और यह राज्य की मूल अवधारणा को चोट पहुंचा रहा है, जो पिछड़े क्षेत्र के लोगों के आत्मसम्मान, मातृ शक्ति के आदर और बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए मांगा गया था।

साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को सुझाव देते हुए कहा  कि कार्यालय में “गढ़वाल वाद, कुमाऊं वाद” और “बाहरी एवं उत्तराखण्डी” की मानसिकता पनप रही है। ब्रह्मचारी हरिकिशन किमोठी ने चेतावनी दी कि यदि इन भ्रष्ट और भेदभावपूर्ण अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेशव्यापी जन-अभियान छेड़ा जाएगा। सुरेंद्र दत्त शर्मा ने सरकार से युवाओं को ठगने वाली ठेकेदारी प्रथा को बंद करने की भी मांग की।

मुद्दा टीवी ख़बर।

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