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“स्कूलों का दायित्व है कि बच्चों को( POCSO अधिनियम) 2012 के बारे में शिक्षित करें”

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यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम पोक्सो (POCSO )Protection of children from sexual offences 2012 बच्चों को यौन दुर्व्यवहार और शोषण से बचाने के लिए कानूनी प्रावधानों को मजबूत करता है| यह 18 वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों को यौन उत्पीड़न और अश्लील साहित्य के अपराधों से पूरी सुरक्षा प्रदान करता है|अभी भी स्कूल के अधिकतर बच्चों को POCSO का ज्ञान नहीं है | इसका सबसे बड़ा कारण है कि यह बच्चों के पाठ्यक्रम में नहीं है, और अक्सर बहुत से शिक्षकों को भी POCSO का ज्ञान नहीं है ,खासकर गांव के क्षेत्र में ,यह बहुत चिंता का विषय है इसी कारण बच्चों के साथ हो रहे शोषण की शिकायत नहीं हो पाती है और इसकी संख्या बढ़ती जाती है|

(POCSO )2012 Protection of children from sexual offences. अधिनियम की शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, शिक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत है ,बच्चों से जुड़े कानून बच्चों को पता होना चाहिए ,ताकि हर विद्यार्थी अपने साथ हुए किसी भी प्रकार का शोषण या अपराध की शिकायत दर्ज कर सके और केवल अपनी ही नहीं बल्कि उसके आसपास के समाज में किसी के साथ भी हो रहे अपराध की जानकारी होने पर वह गलत के खिलाफ आवाज उठा सके और समाज को जागरुक कर सक| स्कूल के सभी बच्चों को पोक्सो की नॉलेज होना अनिवार्य है ,और स्कूल के एडमिनिस्ट्रेशन( प्रशासन) ,विभाग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बनती है कि बच्चों को उनके कानून से अवगत कराए | ताकि बच्चे भी इस कानून के प्रति जागरूक हो सके और बच्चो को ये पता चल सके की उनके साथ कुछ ऐसा तो नहीं हो रहा है जो गलत है जिसके खिलाफ उनको आवाज़ उठानी चाहिए।

संतोष आनंद,ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट, रानीखेत।

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