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आसान नहीं अनिल बलूनी के लिए गड़वाल सीट जीतना, क्योंकि सामने है गणेश

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चुनाव का रण क्षेत्र सज चुका है बीजेपी और कांग्रेस दोनों चुनाव मैदान में उतर चुके हैं और अपनी-अपनी रणनीति बना रहे है हालांकि कांग्रेस ने उत्तराखंड मे अभी दो सीटों पर अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है लेकिन कांग्रेस अपने सीमित संसाधनों से लोगों तक अपनी बात  रखने की पूरी कोशिश कर रही है।

बात करते हैं गड़वाल सीट की तो इस बार  गढ़वाल लोकसभा सीट से  कांग्रेस ने मैदान पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदयाल को उतारा है जबकि भाजपा ने दाव खेला है राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी पर। लेकिन अनिल बलूनी के लिए इस बार गढ़वाल सीट पर विजय पाना आसान नहीं है इसके कई कारण है।

पहला कारण है गणेश गोदियाल का पिछले लंबे समय से जनता के बीच जाकर जनता के मुद्दों को उठाना चाहे  अंकिता भंडारी कैसे हो या जोशीमठ आपदा हो  या फ़िर केदारनाथ मंदिर में सोने की परत‌ का मामला हो। यह तीनों मामले ऐसे थे जिनकी चर्चा मीडिया में जोर-शोर से हुई और यह तीनों मामले ‌ नेशनल मीडिया में छाए रहे और इन तीनों मामलों को गणेश गोदियाल ने बड़े जोर-शोर से उठाया। और इन तीनों मामलों में वो जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहे।

दूसरा कारण – 2019 के कांग्रेस प्रत्याशी मनीष खंडूरी की बात  करें तो मनीष खंडूरी उस समय तीरथ सिंह रावत की अपेक्षा कमजोर प्रत्याशी थे क्योंकि 2019 से पहले ज्यादातर लोगों ने मनीष खंडूरी का नाम तक नहीं सुना था मनीष खंडूरी को 2019 के लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ही कांग्रेस में लाया गया था और उस समय मनीष खंडूरी के पास ना तो कोई संगठन का अनुभव था और ना ही मनीष खंडूरी  कांग्रेस पार्टी में किसी बड़े पद पर रहे थे जबकि उस समय उनके सामने बीजेपी के तीरथ सिंह रावत थे जो कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके थे और विधायक रह चुके थे और उनको संगठन चलाने का एक लंबा अनुभव था। जबकि इस बार ऐसा नहीं है गणेश गोदयाल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और विधायक रह चुके हैं और उनको संगठन चलाने  अच्छा खासा तजुर्बा है। और लम्बे समय से राजनीति में सक्रिय हैं।

एक तीसरा और अहम कारण है लोकल बनाम बाहरी लोकल बनाम बाहरी से आशय है कि कांग्रेस समर्थकों‌‌ का कहना है  गणेश गोदियाल लोकल के हैं जबकि अनिल बलूनी दिल्ली में रहते हैं अगर अनिल बलूनी चुनाव जीत भी गए तो जनता के काम नहीं आ पाएंगे क्योंकि जनता को उन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए दिल्ली जाना पड़ेगा पहाड़ से । जो की  एक आम आदमी की बस की बात नहीं है।

तो यह कुछ कारण है जिनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि इस बार  अनिल बलूनी  के लिए गढ़वाल सीट को जितना आसान नहीं है क्योंकि सामने है कांग्रेस के दमदार प्रत्याशी गणेश गोदियाल । अब देखने वाली बात यह होगी कि कैसे अनिल बलूनी  चुनाव से पहले इन मुद्दों की काट ढूंढते हैं और अपने पक्ष में वोटरो को आकर्षित करते हैं।

देवेंद्र प्रसाद, एडिटर इन चीफ मुद्दा टीवी।

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