कोटा। अक्सर अपने सपनों को पूरा करने गये बच्चे पढ़ाई के बोझ से कई बार ग़लत कदम उठा लेते है। और माता पिता जो अपने बच्चों के अपने साकार होने की आस लगाए रखते हैं, उन्हें अपने बच्चों के इस तरह के आख़िरी ख़त का भी सामना करना पड़ता है। ऐसा ही एक नोट निहारिका के कमरे से मिला, जिसमे उसने लिखा था, मम्मी पापा मैं जेईई नहीं कर सकती इसलिए मैं आत्महत्या कर रही हूँ। मैं लूज़र हूँ।मैं सबसे बुरी बेटी हूँ। सॉरी मम्मी पापा। यही लास्ट ऑप्शन है।
दरअसल ये मामला कोटा का है ,जहां जनवरी के महीने में दूसरी आत्महत्या की खबर सामने आयी है, जिसमें 18 वर्षीय निहारिका ने जेईई मेन्स के एग्जाम से ठीक एक दिन पहले यानी की सोमवार को, सुसाइड नोट छोड़कर आत्महत्या करली। सुसाइड नोट के मुताबिक़ वह एग्जाम की तैयारी को लेकर तनावग्रस्त थी, जिसके चलते उसने अपनी ज़िंदगी को ख़त्म करने जैसा बड़ा कदम उठा लिया।निहारिका बोरखेड़ा की रहने वाली थी और 12वीं की पढ़ाई कर रही थी। आत्महत्या करने से अगले दिन उसका जेईई का एग्जाम था। और उसके चचेरे भाई विक्रम सिंह के मुताबिक़ निहारिका की 12वीं की पढ़ाई चल रही थी। पहले भी उसने 12वीं की परीक्षा दी थी, लेकिन कम नम्बर आने की वजह से वह दुबारा 12वीं की परीक्षा दे रही थी। ओर एक कोचिंग सेंटर से वह जेईई की तैयारी कर रही थी। जिससे वह पढ़ाई व एग्जाम को लेकर तनाव में थी।
पुलिस उप अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने बताया कि छात्रा निहारिका की तीन बहने हैं , जिनमे से वह सबसे बड़ी थी। और उसके पिता विजय सिंह निजी बैंक में गनमैन के तौर पर काम करते हैं।सोमवार सुबह पिता के ड्यूटी पर जाने के बाद सब नीचे ही बैठे थे जबकि निहारिका दूसरे माले पर बने एक कमरे में थी। सुबह 10 बजे करीब दादी ऊपर गई तो निहारिका संदिग्ध हालत में दिखाई दी।जिसके चलते उसे एमबीएस अस्पताल ले जया गया , जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके कमरे से सुसाइड नोट मिला जिसमें उसने माता पिता से माफ़ी माँग कर जेईई ना कर पाने का ज़िक्र किया है।
यह जनवरी का पहला मामला नहीं है इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के विलावला गांव निवासी मोहम्मद जैद मलिक ने 23 जनवरी को अपने कमरे में आत्महत्या कर ली थी। जैद की उमर तक़रीबन 19 साल की थी। जोकि जवाहर नगर क्षेत्र के न्यू राजीव नगर में एक रेजिडेंसी में रहकर एक कोचिंग सेंटर से नीट की तैयारी कर रहा था।
रेशम खान, मुद्दा टीवी।