रशिया-यूक्रेन, इज़राइल-फिलीस्तीन का मामला अभी ठंडा हो ही रहा था कि फिर एक और युद्ध की आशंका लोगो के दिल में चिंता का विषय बनी हुई है। और हर बार सिर्फ़ एक ही सवाल मन में छोड़ देती है कि आख़िर कितनी बार बेगुनाहों को ऐसे युद्ध में अपनी जाने समर्पित करनी पड़ेगी। जिस तरह रशिया-यूक्रेन, इज़राइल-फिलीस्तीन जैसे भयानक युद्ध से पूरा विश्व बाहर आ ही रहा था कि फिर एक और युद्ध का शंख लोगों को बजता हुआ सुनाई दे रहा है।
दरअसल, इरान ने पाकिस्तान पर मिसाइल और ड्रोन छोङकर आतंकि संगठन को मिटाने का प्रयास किया। जिससे पाकिस्तान ने भी जवाबी हमले में इरान पर हमला कर दिया। एक तरफ जहाँ दोनों देशों के मंत्री आपस में हाथ मिला रहे थे, वहीं इरान और पाकिस्तान एक दूसरे पर हवाई हमले को अंजाम दे चुके थे।बता दें इरान ने 16 जनवरी को मिसाइल और ड्रोन छोङकर पाकिस्तान के बलूचिस्तान पर आतंकि संगठन को खत्म करने के लिए हमला कर दिया। वहीं इस हमले से पाकिस्तान चुप नहीं बैठा और जवाबी हमले के तौर पर इरान पर हमला कर दिया। अब एक सवाल उठता है कि,आखिर क्यूँ इरान ने अपने पङोसी देश को ही निशाना बनाया?
दरअसल जैश-अल-अदल ने पहले भी मार्च और फिर 22 दिसंबर 2023 को इरान पर हमला किया था। जिनमें पहले 4 इरानी पुलिस अफसर और दूसरे हमले में 11 इरानी पुलिस अफसरों की जान चली गई थी।आपको बता दें जैश-अल-अदल इक सुन्नी संगठन है, जिसकी स्थापना 2012 में हुई थी। जिसे ईरान, जापान, यूएस, आदि देश ने आतंकी संगठन घोषित किया है। 2012 में बनी जैश अल अदल को ईरान के लोग जैश अल जहन्नम भी कहते हैं। जोकि पाकिस्तान से प्रचालन करती है।
लेकिन दोनों देश एक दूसरे के दुश्मन क्युँ बन गये।
दरअसल दोनों एक दूसरे को इस संगठन के लिए आरोप लगाते है। ईरान का कहना है कि पाकिस्तान से ही उनकी ज़मीन पर आतंकी हमले होते हैं! वही पाकिस्तान ने भी अपने जवाबी हमले को आतंकवाद ख़त्म करने का नाम दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि इरान में आतंकि संगठन छिपे हैं जो उनका लिए खतरा है। यही नहीं पाकिस्तान ने अपने जवाबी हमले को मार्ग बार सरमाचार का नाम दिया है जिसका मतलब होता है लड़ाकों का खात्मा। हालाँकि हमले के समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इकोनॉमिक फोरम के लिए दावोस में थे जोकि हमले के बाद फ़ोरन पाकिस्तान लौट आये थे। इस्लामाबाद ने इन हमलों को बेबुनियादी बताया है जबकि पाकिस्तान का कहना है कि इस हमले से ना केवल आतंकवादी बल्कि उनके देशवासियों की भी जाने गई है और वह ये बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। वही चाइना और यूएस के प्रधानमंत्री ने इस मामले को मौखिक रूप से सुलझाने की बात कही है। युद्ध आगे बडे या ना बड़े लेकिन युद्ध में जीतता कोई नहीं क्योंकि युद्ध में सभी चीज़ो का विनाश हो जाता है, और विनाश कभी जीत का रूप नही ले सकता।
रेशम खान, मुद्दा टीवी।