अल्मोडा। सोचिए जब कहीं कोई सड़क दुर्घटना हुई हो और बच्चों को इमरजेंसी में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भरती करने के लिए रेफर किया गया हो लेकिन दुसरे अस्पताल जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध न हो या एंबुलेंस स्टार्ट ही ना हो । तो घायलों के परिजनों पर क्या गुजरेगी।
कल कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला अल्मोड़ा के बेस अस्पताल में ।दरअसल कल सुबह टाटीग में एक सड़क दुर्घटना में एक शिक्षक सहित सात बच्चे घायल हो गए थे घायलों को बेस चिकित्सालय अल्मोड़ा लाया गया इनमें से तीन बच्चों की नाजुक हालत देखते हुए इन्हे हल्द्वानी रेफर के लिए कहा गया । लेकिन बच्चों को हल्द्वानी ले जाने के लिए जब सरकारी एंबुलेंस 108 में रखा गया तो एंबुलेंस काफी समय तक स्टार्ट ही नहीं हो पाई वहां मौजूद लोगों ने जैसे तैसे धक्का मार कर एंबुलेंस को स्टार्ट करवाया अव्यवस्थाओं से नाराज लोग जब बेस अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हैं तो आनन फानन में दो घायल बच्चों को इस एंबुलेंस में एक साथ रख दिया जाता है लेकिन 108 का चालक दो बच्चों को एक साथ ले जाने के लिए मना कर देता है फिर एक बच्चे को वापस नीचे उतार दिया जाता है और चालक एक बच्चे को लेकर हल्द्वानी के लिए चल देता है।
इस बीच अस्पताल में भीड़ इकट्ठा होनी शुरू हो जाती है और पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान ,भाजपा प्रदेश मंत्री अनुसूचित मोर्चा नरेंद्र आगरी , पूर्व दर्जाधारी मंत्री बिट्टू कर्नाटक सहित डीएम अल्मोड़ा और एसपी अल्मोड़ा भी मौके पर पहुंच जाते हैं ।लेकिन बेस अस्पताल की व्यवस्थाओं पर कोई कुछ बोलने से बचता हुआ नजर आता है । लेकिन सवाल यह है कि अभी तो जैसे तैसे प्राइवेट एंबुलेंस से दूसरे दो बच्चों को हल्द्वानी ले जाया गया लेकिन अगर यह दुर्घटना रात में हुई होती और रात में कोई प्राइवेट वाहन नहीं उपलब्ध होता तो फिर क्या होता ? ऐसा नहीं है अवस्थाओं का ये पहला मामला है बेस अस्पताल की व्यवस्थाओं के बारे में समय-समय पर लोगों में आक्रोश देखने को मिलता है यह बताया जा रहा है की ये एंबुलेंस काफी लम्बे समय से खड़े थे और उनकी समय-समय पर सर्विसिंग भी होती है या नहीं होती है यह कोई नहीं जानता लेकिन इस अस्पताल में अल्मोड़ा जिले के कई गांव के लोग निर्भर है इसलिए हर समय 2 एंबुलेंस का उपल्ब्ध रहना ज़रूरी है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके।
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