18.5 C
Dehradun

लापरवाही से जल सकते हैं वन संपदा, जंगलों को बचाना है हम सब की जिम्मेदारी

Must read

मई माह से गर्मी प्रचंड रूप लेती जा रही है जिसकी वजह से जंगलों मे आग की घटनाएं निरंतर बढ़ती जा रही है अमूमन देखा गया है कि आज अपने आप ही नहीं लगती हमारी लापरवाही के कारण लगती है ।हमारे उत्तराखंड के अधिकांश क्षेत्रों में खेती जंगलों की तलहटी क्षेत्र में की जाती है और कुछ लोग फसलों की कटाई छटाई के बाद बचा हुआ कूड़ा अपने खेतों में ही जलाते हैं। और कभी कभी आग को अच्छी तरह बुझाते नहीं जिससे आग धीरे-धीरे जंगलों में प्रवेश कर विकराल रूप धारण कर लाखों की वन संपदा नष्ट कर देती है ।दूसरा एक कारण ये देखा गया है कि गांव से पशुओं को चराने हेतु और एक गांव से दूसरे गांव जाने के लिए जंगलों का रास्ता अपनाना पड़ता है इस दौरान कभी कभी चरवाहों या दुसरे गांव जाने वाले लोगों के द्वारा भी लापरवाही से जलती बीड़ी सिगरेट फेंक देने से भी आग लगने की घटनाएं देखने को मिलते रहती है इसलिए ये जरूरी है कि कूड़ा करकट जलाते समय लोगों को ये देखना चहिए कि आग अच्छी तरह बुझी है या नहीं अगर एक छोटी सी चिंगारी भी बची है तो उसको अच्छी तरह से बुझाने के बाद ही घर जाए और जंगलों के बीच से गुजरते समय जब हम बीडी सिगरेट पीते हैं तो बीड़ी सिगरेट अच्छी तरह बुझा कर ही फेकनी चाहिए ।

प्राचीन काल से ही मानव और वनस्पति संपदा का घनिष्ठ संबंध रहा है पर्यावरण का संतुलन वनसंपदा द्वारा ही संभव है वृक्ष हमें ऑक्सीजन के रूप में शुद्ध हवा जो जीवन दायिनी होती है प्रदान करते हुए हमारे अंदर से निकलने वाली दूषित हवा जिसे हम कार्बनडाइऑक्साइड कहते हैं अपने में सोख लेते हैं लेकिन मनुष्य की थोड़ी सी लापरवाही से लगी आग करोड़ों की वन संपदा व छोटे-छोटे पौधे व औषधीय जड़ी-बूटियों को अपने आगोश में लेकर खाक कर देती है ।आग लगने से हवा दूषित हो जाती है जिससे विषैली हवा हमारे शरीर में प्रवेश करती है और हमे कई बीमारी का सामना करना पड़ता है दूसरी तरफ आग लगने से छोटे-छोटे पौधे नष्ट हो जाते हैं जिससे वनों का विकास नहीं हो पाता है और आग से पुराने उम्रदराज पेड़ धीरे धीरे सूखने लगते हैं और इससे हमारे जंगल वृक्षविहीन होते जा रहे हैं हमारे बीच पानी की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है क्योंकि वृक्षों में आकाश से बरसने वाले पानी को खींचने की क्षमता होती है ।आपने ध्यान दिया होगा जहां जितने घने जंगल होंगे वहां सबसे अधिक बारिश होती है पर्याप्त मात्रा में बारिश तभी होगी जब जंगल घने होंगे जंगल घने होंगे पर्याप्त मात्रा में पानी होगा जिससे जमीन में नमी बनी रहेगी नमी होने से हमारी फसलों में वृद्धि होगी तथा जंगलों के नजदीक पढ़ने वाले पानी के प्राकृतिक स्रोत रिचार्ज होंगे जिससे हमें पानी की समस्या नहीं होगी। वनों के विकसित होने से हमें पर्याप्त मात्रा में पशुओं के लिए चारा और इमारती लकड़ी ,औषधीय जड़ी बूटी प्राप्त होंगी जिससे हमारी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इसलिए जंगलों को बचाए।

रघुनाथ प्रसाद, पूर्व अनुभाग अधिकारी, वन विभाग

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article