देहरादून के दून अस्पताल में एक नौजवान जिला समन्वयक के रूप में कार्य करते हैं इनकी टीम मे कई आयुषमान मित्र काम करते हैं इनका नाम है महेंद्र प्रसाद हर किसी की सहायता के लिए हमेशा तत्पर कोई भी मरीज या मरीज के रिश्तेदार जो भी उनके पास गया कभी महेंद्र प्रसाद ने सहायता करने से मना नहीं किया उनके पास आने वाला हमेशा कहता है कि महेंद्र प्रसाद जैसे लोग बहुत कम है ।लेकिन कहते हैं कि अक्सर अच्छे लोगों के खिलाफ ही कुछ लोग षड्यंत्र रच जाते हैं और इसी के तहत महेंद्र प्रसाद पर झूठा आरोप लगाकर उनका रातों-रात तबादला कर दिया गया।
अब क्या है पूरा मामला आपको बताते हैं। दून अस्पताल में 12 अप्रैल 2023 को सविता मित्तल नाम की एक बुजुर्ग जिनकी आयु 72 वर्ष है इलाज के लिए आती हैं लेकिन गंभीर समस्या को देखते हुए दून अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें बाहर इलाज करवाने के लिए रेफर कर दिया ।लेकिन जब उनके घर वाले उन्हे बाहर अस्पताल मे ले गए तो बाहर डॉक्टरों ने कहा कि आप दून अस्पताल के डॉक्टरों से दोबारा लिखवा कर लाए तभी हम इलाज कर पाएंगे। इसी के तहत मरीज सविता मित्तल के घरवाले सविता मित्तल को लेकर 15 अप्रैल को दुबारा दून अस्पताल लेकर आए लेकिन सविता मित्तल इस कंडीशन में नहीं थी कि वह चलकर दून अस्पताल के अंदर आ सके उनकी कंडीशन को देखते हुए सविता मित्तल के घर वालों ने उस दिन मौजूद डॉक्टर आमिर से निवेदन किया कि वह सविता मित्तल को बाहर गाड़ी के अंदर ही देख ले बताया जा रहा है कि डॉक्टर आमिर ने मरीज़ को बाहर जाकर गाड़ी मे देखने से मना कर दिया जिस कारण डॉक्टर आमिर और सविता मित्तल के घर वालों में विवाद हो गया। इसी बीच महेंद्र प्रसाद भी वहां पहुंचे और उन्होंने डॉ आमिर से इंसानियत के नाते रिक्वेस्ट की कि वह मरीज को बाहर गाड़ी मे देख ले लेकिन डॉक्टर आमिर ने सीनियर अधिकारियों का हवाला देते हुए मरीज को गाड़ी में देखने से मना कर दिया। जब यह हंगामा चल रहा था इसी दौरान वहां सिनियर डॉ नरेश भी पहुंचे और उन्होंने मरीज के घरवालों को शांत कराया और यही मामला खत्म हो गया।
इसके बाद महेंद्र प्रसाद मई के महिने किसी पारिवारिक कार्य की वजह से छुट्टी में चले जाते हैं और जब 12 मई को वह वापस बनारस से अपने परिवार के साथ लौट रहे थे तो उनको उनकी कंपनी राइटर इंफॉर्मेशन की तरफ से एक वीडियो कॉल आती है और बताया जाता है कि आपके द्वारा डॉक्टर रितेश से बदतमीजी की गई है जिस कारण आपका तबादला रुद्रप्रयाग किया जाता है यह सुनकर महेंद्र प्रसाद भौचक्के रह जाते हैं क्योंकि जिस डॉक्टर रितेश से बदतमीजी की बात उनकी कंपनी वाले कर रहे थे यह मामला डॉक्टर रितेश का था ही नहीं जबकि इस मामले में उस दिन डॉ आमिर और सीनियर ऑफिसर डॉ नरेश थे । और डॉक्टर नरेश ने ही पूरे मामले को शांत करवाया था।
वही जब डॉ नरेश को महेंद्र प्रसाद ने पूरी जानकारी दी तो डॉक्टर नरेश ने यह लिखित रूप मे माना है कि महेंद्र प्रसाद के द्वारा उस दिन किसी भी डॉक्टर के साथ बदतमीजी नहीं की गई है ।वहीं इसके बाद आयुष्मान मित्रों में आक्रोश है आयुष्मान मित्रों का कहना है कि एक सज्जन आदमी को फसाकर ट्रांसफर किया जा रहा है अगर ट्रांसफर नहीं रोका गया तो सभी आयुष्मान मित्र हड़ताल पर चले जाएंगे।
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