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सतीश कौशिक के जन्मपत्रिका के ५ विशेष योग – जानते है डॉ सुमित्रा से

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एक हिंदू ब्राह्मण परिवार में जन्मे सतीश कौशिक अभिनेता, निर्देशक और निर्माता है। इनका जन्म १३ अप्रैल १९५६ को हुआ था। इनका निधन ८ मार्च, २०२३ को ६६ वर्ष की आयु में हुआ। पूरा भारतीय मनोरंजन उद्योग ऐसे बहुमुखी अभिनेता के नुकसान का शोक मना रहा है। सतीश कौशिक ज्यादातर अपने बहुमुखी अभिनय कौशल के लिए जाने जाते थे। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को हर कोई याद कर सकता है।जन्म के समय ही ये बताया जा सकता है की व्यक्ति महान होगा या नहीं। सतीश कौशिक के जन्मपत्रिका के विशेष योग है जो उन्हें महान बनाते है।

१। गजकेसरी योग
जब चन्द्रमा से केन्द्रस्थान (१ /४ /७ /१०) में गुरु हो तो गजकेसरी योग होता है।योगजनक ग्रह: चन्द्रमा व गुरु।

गजकेसरी योग क्या फल देता है: ‘गजकेसरी योग’ में उत्पन्न जातक तेजस्वी, धन धान्य से युक्त, मेधावी, गुणी, राजप्रिय होता है। जातक केसरी अर्थात शेर की तरह अपने शत्रुवर्गो को नष्ट कर देता है। ऐसा व्यक्ति का वाणी पर आधिपत्य होता है और ये सभाओं में किसी विषय पर गम्भीरता पूर्वक और अधिकार से बोलते है, भाषण देते है। ये व्यक्ति राजस वृत्ति का होता है। बहुत तीव्र बुद्धि हो, महान् यश प्राप्त करे और अपने स्वाभाविक तेज से ही औरों को जीत लें। सतीश कौसल में ये गन उनके गजकेसरी योग से आये थे।

२। दुरुधरा योग – जब चन्द्रमा से द्वितीय तथा द्वादश में सूर्य के अतिरिक्त कोई न कोई ग्रह हो तो दुरुधरा नाम का योग होता है।योगजनक ग्रह : मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि।

दुरुधरोत्पन्न मनुष्य धनी, वाहनयुक्त, दानी, सुखी, नौकरों से युक्त तथा शत्रुहन्ता होता है। दुरुधरोत्पन्न मनुष्य वाणी बुद्धि पराक्रम व गुणों से संसार में ख्याति प्राप्त करने वाला, स्वतन्त्र सुख लक्ष्मी वाहन सवारी आदि के सुख को भोगने वाला, दानी, अच्छे व्यवहार वाला व प्रधान होता है।
सतीश कौसल लोक प्रिय भी थे और आज फिल्म इंडस्ट्री का हर व्यक्ति उनकी बुद्धि और व्यव्हार की प्रशंसा कर रहा है।

३। कर्मजीव योग
लग्न, सूर्य या चन्द्र से दशम स्थान के स्वामी बुध हों तो यह योग होता है ।

यह योग बुध से सम्बन्धित व्यवसाय जैसे फिल्म निर्माता के लिए सहायक होता है ।

४। सूर्य बुध योग
सूर्य और बुध एक ही भाव में हो तो बुधादित्य योग कहलाता है ।

ये योग व्यक्ति को मधुर भाषी, चतुर, विद्वान, अध्ययनशील धनवान, अनुशासित, स्वयं के धनोपार्जन से सेवा करने वाला होता है । विद्वान एवं प्रतिष्ठित अपने सभी कार्यों से होता है ।
सतीश कौशल के जन्मपत्रिका का ये योग उनको अच्युत ख्याती का भागी बनाता है।

५। सफल अमल कीर्तियोग – लग्न से दशम स्थान में शुभ ग्रह स्थिति हो तो ‘अमल योग’ बनता है।योगजनक ग्रह : चन्द्रमा और बुध शुक्र बृहस्पति।

फल : इसमें उत्पन्न जातक राजपूज्य, भोगेन्द्र, दानी, बन्धुजनप्रिय, परोपकारी तथा गुणवान् होता है।। जो अमला योग में पैदा होता है, वह आचारवान् धर्म में मति रखने वाला, प्रसन्न, सौभाग्यवान्, राजा द्वारा सम्मानित, मृदु स्वभाव का, मुस्कराकर बोलने वाला और धनी होता है। अमला योग में जन्म लेने वाला मनुष्य निर्मल कीर्ति वाला तथा स्थायी धनवान् होता है।
सतीश कौसल के मृदु स्वाभाव के पीछे अमला योग का हाथ है।

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और सद्गति देवे।

सेलिब्रिटी वास्तु शास्त्री डॉ सुमित्रा अग्रवाल
सिटी प्रेसीडेंट इंटरनेशनल वास्तु अकादमी , कोलकाता

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