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देहरादून,लिब्रा लॉ कॉलेज में मनाया गया मानवाधिकार दिवस

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देहरादून। लिब्रा कॉलेज ऑफ लॉ, डूंगा, देहरादून में Dignity, freedom and Justice विषय पर मानवाधिकार दिवस को मनाया गया। इस अवसर पर लिब्रा कॉलेज ऑफ लॉ के प्रधानाचार्य डा॰ अमित कुमार श्रीवास्तव ने समारोह में उपस्थित मुख्य अतिथि BFIT GROUP OF INSTITUTION के डायरेक्टर श्री अनिंदर सिंह अरोड़ा और रजिस्ट्रार श्री भूपेंद्र सिंह अरोड़ा को बुके देकर स्वागत किया । इस मौके पर प्रधानाचार्य डा॰ अमित कुमार श्रीवास्तव ने मानवाधिकार विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि मानवाधिकार लोगों के बीच मे समानता को बताता है, यह समानता को आगे ले जा कर न्याय प्रदान करने का कार्य करता है। साथ ही कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मानवाधिकार ना केवल नागरिकों को बल्कि विदेशीयों को भी मिला है मानवाधिकार कि शुरुआत ब्रिटेन के मैग्ना कार्टा द्वारा 1512 ई. मे हूई। मैग्ना कार्टा मे सबसे पहले नागरिकों को जीवन, स्वतंत्रता और सम्पत्ति का मानवाधिकार दिया गया है, यही से मानवाधिकार कि उत्पति हुई थी, इसके पश्चात जॉन लॉक ने 16वी शताब्दी में प्राकृतिक अधिकारो के बारे में बताया फिर 10 दिसंबर 1948 ई.मे मानवाधिकार कि सार्वभौमिक घोषणा कि गयी, जिसमे 30 मानवाधिकार दिये गये है। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में मानवाधिकार बिल ऑफ राइट के रूप में है हमारे भारतीय संविधान में मानवाधिकार को भाग 3 में अनुच्छेद 12 से 35 तक में दिया गया है। भारत में मानवाधिकारों से संबंधित कानून मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम , 1993 में दिया गया है, यह मानवाधिकार सरकार के लिए एक पैमाना निर्धारित करते हैं। सरकारी अधिकारियों का यह दायित्व है कि वे मानवाधिकार को ध्यान में रखते हुए कार्य करें। सरकार मनमाने पन से कार्य नहीं कर सकती हैं , मानवाधिकारो की रक्षा तभी संभव है जब सरकार नागरिकों के लिए लगातार कल्याणकारी कार्य करती रहें।
मुख्य अतिथि डायरेक्टर अनिन्दर सिंह अरोरा जी ने यह कहा कि मानवाधिकार हमारे लिए बहुत जरूरी अधिकार है इसके बिना मनुष्य की जिंदगी अधूरी है मानवाधिकार के अंतर्गत शुद्ध हवा, पानी इत्यादि अधिकार आते हैं सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 के अंतर्गत बहुत सारे मानव अधिकारों को शामिल कर लिया है इसके अंतर्गत वे सारे अधिकार आ गए हैं जो एक मनुष्य की गरिमा को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है यह अधिकार सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था को बनाए रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं । रजिस्ट्रार भूपिंदर सिंह अरोरा जी ने यह कहा कि मानवाधिकारों को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 2 में परिभाषित किया गया है, मानवाधिकार अधिनियम, धारा 2 के संदर्भ में, “मानवाधिकार” का अर्थ है, भ।रतीय संविधान के तहत गारंटीकृत व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और सम्मान से संबंधित अधिकार या सन्निहित अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों में और भारत में अदालतों द्वारा लागू करने योग्य मानवाधिकार से है। यहां पर “अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदा” का अर्थ नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदा और 16 दिसंबर, 1966 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाए गए आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदा से है।
कार्यक्रम में लिब्रा कॉलेज ऑफ लॉ की सहायक आर्चाय श्रीमती रीना रमोला, सुश्री सुरक्षा गर्ग, सुश्री वैदेही नेगी, एवं कॉलेज के समस्त छात्र/छात्राएँ उपस्थित थे। इस कार्यक्रम मे उपस्थित छात्र एवं छात्राएं अत्यधिक लाभान्वित हुए।

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