देहरादून।पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चुनाव में धनबल की खर्च सीमा पर कटाक्ष करके एक बार फिर भ्रष्टाचार के कारणों में इसे एक महत्वपूर्ण कारण बताया है ।बुधवार को एक कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री ने कई मुद्दों पर खुलकर बात की उन्होंने भ्रष्टाचार के ऊपर बात करते हुए कहा कि आज एक विधायक का चुनाव जीतने के लिए 5 से ₹25 करोड़ तक का खर्चा करना पड़ रहा है अगर कोई ₹25करोड़ खर्च करके आएगा तो वह क्या करेगा खुद ही सोचिए?
साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति का मतलब अच्छे काम करना और इमानदारी से ही नहीं है बल्कि एक अच्छी राजनीति करना भी आना चाहिए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि शायद इसकी मुझ में कमी थी और इसका एक प्रमुख कारण ये रहा है कि मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूं मैंने लगभग 40 साल की उम्र तक एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम किया है चाहे वह उत्तरकाशी की आपदा हो या फिर चाहे गुजरात की आपदा हो मैंने एक सच्चे सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी सेवा दी है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उनके कार्यकाल में चर्चित देवस्थानम बोर्ड पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा जब तक देवभूमि है देवस्थानम है उसकी उचित व्यवस्था के लिए बोर्ड की आवश्यकता होती रहेगी वर्षों से इसकी कमी खलती रही थी पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने भी देवस्थानम बोर्ड बनाने के बारे मे सोचा था। साथ ही उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में 1 वर्ष तक सभी से देवस्थानम बोर्ड को लेकर चर्चा होती रही कई बार चर्चा हुई विधानसभा के पटल पर जब चार धाम देवस्थानम प्रस्ताव रखा गया तब मैं उपस्थित नहीं हो पाया था फिर भी पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों ने इसे सर्वसम्मति से पास कर दिया और मेरे मुख्यमंत्री पद से हटते ही सब पलट दिया और इसका कारण बताया कि जनता की एसी ही इच्छा थी।
अल्पसंख्यक वर्ग को लेकर एक सवाल के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में शताब्दियों से सबका सम्मान होता आया है। आप किसी धर्म, किसी पूजा पद्धति, किसी भी विचारधारा के मानने वाले हों, किसी को कोई दिक्कत नहीं। बस आप में भारतीयता होनी चाहिए ।
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